ज़िन्दगी और मौत का फासला

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जिंदा हैं, तब जीना भूल जाते हैं लोग,
मौत जब सामने खड़ा हो, तब जीना चाहते हैं लोग।

जिंदा हैं, तब हजारों मर्तबा मरना चाहतें ह लोग,
जब मौत गले लगाना चाहता है, तब जीने का एक मौका चाहतें है लोग।

जिंदा हैं तब अपनों को जाने अंजाने चोट पहुंचाते हैं लोग,
मौत जब दस्तक देता है, तब अपनों को प्यार न दे पाने का अफ़सोस करतें हैं लोग।

जिंदा हैं, तब मिलने, हालचाल पूछने आए न आए लोग,
मरने पर श्रद्धांजलि के पुष्प चढ़ाने, आ ही जाते हैं लोग।

जिंदगी और मौत का फासला तय करते-करते,
कुछ खुशी खुशी जी ही लेते हैं जिंदगी,
मौत के अंजाने डर से, कुछ
पल पल मरते रहते हैं, जिंदगी ।।

-Deepika

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मेरी बिटिया

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छोटी सी बिटिया मेरी,
जाने कब बड़ी हो गई,
नन्ही सी परी मेरी,
जाने कब सयानी हो गई।

हाथों में लिए घुमाती थी जिसे,
हल्के फुल्के अपने इशारों से हंसाती थी जिसे,
उंगली पकड़ के चलना सिखाया जिसे,
अक्षर अक्षर जोड़कर पढ़ना सिखाया जिसे,
सिरहाने रखकर कहानियां सुनाती जिसे,
गोदी में लिटाकर लोरी सुनाती जिसे,
छोटी सी बिटिया मेरी
जाने कब बड़ी हो गई,
नन्ही सी परी मेरी,
जाने कब सयानी हो गई।

गिरते पड़ते पैरों पर खड़ा होना सीखा जिसने,
आज अपने पैरों पर खड़ी हो गई,
हंसते हंसाते, गिरते संभलते,
मुझसे भी ऊंची हो गई ,
छोटी सी बिटिया मेरी
जाने कब बड़ी हो गई,
नन्ही सी परी मेरी,
जाने कब सयानी हो गई।

अपने तोतले बोल और गानों से, दिल बहलाया जिसने,
अपने नन्हे हाथों से मेरे बालों को सहलाया जिसने,
दुपट्टा को साड़ी की तरह लहराया जिसने,
देखते ही देखते, गुड़िया मेरी जवां हो गई,
छोटी सी बिटिया मेरी
जाने कब बड़ी हो गई,
नन्ही सी परी मेरी,
जाने कब सयानी हो गई।

-Deepika
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